अंतरजाल की दुनिया और जीवन में मोहित शर्मा 'ज़हन' के बिखरे रत्नों में से कुछ...

Wednesday, June 20, 2012

अंधा रक्षक (Inspector Steel)

2009 (RC Forums, RFN and RC Homepage)

 अंधा रक्षक

कभी जो छुपे अपराध और अपराधियों को पकड़ लेता था....आज अपने सामने हो रहे जघन्य अपराधो को अनदेखा कर रहा है..कभी जो फ़र्ज़ के लिए मर मिटने को तत्पर रहता था....आज अपने सामने मासूमो को मरते देख रहा है..क्या अंधा हो गया है हमारा रक्षक??
"राजनगर दैनिक" की पहले पन्ने की मुख्य खबर.

सरफिरा हुआ राजनगर का रखवाला..

राजनगर की फ़र्ज़ की मशीन कहे जाने वाले सुपर कॉप इंस्पेक्टर स्टील के व्यव्हार मे कल अजीब सा बदलाव देखा गया. वो बड़े अपराधो को नज़रंदाज़ करते हुए मामूली अपराध मे दोषी लोगो को पकड़ने मे जी-जान से लगे हुए थे. कल शहर भर मे जुम्बा नामक अपराधी और उसके गैंग का आतंक रहा. उस गैंग के लूट-पाट, हत्या, अपहरण, जैसे कुछ संगीन अपराध तो खुद इंस्पेक्टर स्टील के सामने हुए....पर इंस्पेक्टर स्टील साधारण यातायात नियमो को तोड़ने वाले व्यक्तियों के चालान काटने मे मशगूल रहे. यहाँ तक की उनके डर से उनसे बचकर भागते बाइक सवार एक युवक की बाइक के टायरों पर इंस्पेक्टर स्टील ने गोलियां चलायी जिस वजह से संतुलन खोकर वो बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया. खबर ये भी मिली है की सार्वजनिक स्थानों पर बहस करते या धूम्रपान करते लोगो से उन्होंने भारी चालान लिया और चालान का भुगतान ना करने वालो को तुंरत गिरफ्तार कर लिया. कल की घटनाओ से शुब्ध राजनगर के डिप्टी कमिशनर श्री राघव राम ने इंस्पेक्टर स्टील को बर्खास्त करने की सिफारिश करते हुए पुलिस मुख्यालय मे अपनी रिपोर्ट सोंपी है. सम्बंधित चित्र, खबरें और इस मामले मे विशेषज्ञों की राय स्थानीय पन्ने पर देखे.
 
अँधा रक्षक -
राजनगर मे कदम रखा था एक इंटरनेशनल डॉन जुम्बा ने. जुम्बा के साथ था उसका पूरा गैंग जो राजनगर से भारत भर को लूटने और यहाँ आतंक फैलाने के अभियान की शुरुआत कर चूका था. पर जुम्बा और उसके गैंग की राह मे हर बार आ जाता था इंस्पेक्टर स्टील. उसके गैंग के बहुत से सदस्य स्टील द्वारा पकडे जा चुके थे. जुम्बा भारत और यहाँ के अपराध विनाशको से अनजान था इसलिए वो स्टील से सीधा नहीं भिड़ना चाहता था.

जुम्बा ने भारत भर मे किसी अपराधिक प्रकर्ति वाले अद्भुत शक्तिधारक इंसान की तलाश शुरू कर दी.....जुम्बा की तलाश अपने आप ही ख़त्म हो गयी जब दिल्ली से भागा बुद्धिपलट उसे राजनगर मे लोगो को अपने वश मे करके अनोखे अपराध करता मिल गया. स्टील के मौके पर पहुँचने से पहले जुम्बा बुद्धिपलट को समझा कर अपने अड्डे पर ले आया.
 
रास्ते मे जुम्बा ने बुद्धिपलट को अपना परिचय देते हुए उसके अतीत के बारे मे जाना.....जुम्बा को लगा की बुद्धिपलट के दम पर वो एक झटके मे स्टील नामक अपनी सबसे बड़ी समस्या से पार पा सकता है. अपने अड्डे पर ले जाने के बाद जुम्बा ने बुद्धिपलट को अपनी योजना समझाई. योजना के तहत बुद्धिपलट को स्टील के दिमाग को अपने कब्जे मे लेना था. बुद्धिपलट शहर मे अपराध करना शुरू करता है और जल्द ही स्टील उस तक पहुँचता है. योजना अनुसार बुद्धिपलट अपनी मानसिक तरंगे स्टील पर छोड़ता है.....पर उसके दिमाग पर काबू नहीं कर पाता. उसे महसूस होता है की स्टील के शरीर मे लगे "जैमर" डिवाइस से निकल रही तरंगो की वजह से उसकी मानसिक तरंगे स्टील के दिमाग तक पूरी तरह नहीं जा रही. पर बुद्धिपलट की मानसिक तरंगो की वजह से स्टील के दिमाग मे असहनीय दर्द हो रहा था. फिर भी स्टील बुद्धिपलट को जकड लेता है.....स्थिति पर नज़र रख रहा जुम्बा मौका देख कर पुलिस इन्फोर्समेंट आने से पहले बुद्धिपलट को स्टील से छुड़वा कर फरार हो जाता है.

जुम्बा की समझ मे नहीं आ रहा था की आखिर बुद्धिपलट इंस्पेक्टर स्टील को अपने कब्जे मे क्यों नहीं कर पाया. तब बुद्धिपलट ने उसे कारण बताया.

बुद्धिपलट - मैंने उसके दिमाग पर अपनी मानसिक तरंगो से कब्ज़ा करने की कई कोशिशें की लेकिन उसके शरीर से निकल रही अजीब से तरंगे मेरी तरंगो को उसके दिमाग तक पहुँचने से रोकती रही....माफ़ करना जुम्बा शायद मै तुम्हारे काम का आदमी नहीं हूँ.

जुम्बा - तुम बहुत काम के हो....इस नाकामी मे तुम्हारी कोई कमी नहीं है....ये हार हमे इसलिए मिली है क्योकि स्टील के बारे मे हम ज्यादा नहीं जानते....तुम्हारी मानसिक तरंगो मे अवरोध स्टील के शरीर मे लगे जैमर नामक यंत्र से निकल रही तरंगे पैदा कर रही थी. अब हमे योजना मे थोडा सा बदलाव करना होगा.
 
जुम्बा अपनी बदली हुई योजना बुद्धिपलट को समझाता है.

जुम्बा - स्टील के अन्दर से जैमर को निकलना तो नामुमकिन सा काम है पर हाँ जैमर की किरणों को कुंद किया जा सकता है....इस बीच तुम्हे अपनी किरणों से उसकी दिमागी संरचना को मेरे बताये निर्देशों के अनुसार बदलना होगा. अगर वो अब हमारा गुलाम नहीं बन सकता तो बाद मे बेबस होने पर अपने-आप हमारे तलवे चाटेगा....क्या पता वो इस बार दर्द सह ना पाए और उसके दिमाग की कोशिकाएं मृत हो जाए जिस से वो मारा जाए....दोनों ही स्थितियां हमारे पक्ष मे होंगी...हा हा हा हा....मगर मै नहीं चाहता की स्टील को बेबस करने से पहले हमारा और ज्यादा नुक्सान हो....शहर मे पुलिस और ध्रुव सक्रिय हो गए है तुम्हे भेस बदल कर स्टील तक पहुंचना होगा..चिंता मत करना मै और मेरा पूरा गैंग तुमसे ज्यादा दूर नहीं होगा.

योजना के अनुसार वो अपनी स्पेशल कार से रात्रि गश्त कर रहे इंस्पेक्टर स्टील का रास्ता रोकते है.

बुद्धिपलट - रुक जा स्टील....तेरा सफ़र अब यहीं ख़त्म होता है.

इंस्पेक्टर स्टील - मुझे उम्मीद थी की हमारा फिर से आमना-सामना होगा. पुलिस रेकॉर्ड्स मे तुम्हारे बारे मे मै सब जान चूका हूँ बुद्धिपलट. वैसे मै तुम्हारा एक बात के लिए धन्यवाद देना चाहता हूँ.

बुद्धिपलट - वो किस बात के लिए....?

इंस्पेक्टर स्टील - मुझसे मिलने के लिए तुमने शहर मे अपराध करने के बजाये मेरे गश्त करने के रास्ते पर इंतज़ार किया....तुम्हे अर्रेस्ट करने के बाद मै तुम्हारी सजा इस बात पर एक-दो महीने कम करवाने की सिफारिश करूँगा.

बुद्धिपलट - शहर वालो पर मै अपना असली कहर बाद मे बरपाऊंगा..अभी तो मेरा शिकार तू बनेगा.

तभी जुम्बा के गैंग का एक आदमी स्टील की तरफ एक ख़ास गन से निरंतर किरणों का वार करने लगता है और स्टील को असल दुनिया के साथ-साथ असहनीय आवाजों के साथ अजीब सी आकृतियाँ दिखने लगती है जिस से स्टील अपना ध्यान एक जगह केन्द्रित नहीं कर पाता. स्टील को एहसास होता है की उन किरणों से उसके जैमर का असर भी कम हो गया है. वो असहनीय आवाजें स्टील को अपना सर पकड़ने पर मजबूर कर देती है.

बुद्धिपलट - मैंने तो तेरे कई किस्से सुने थे इंस्पेक्टर....और तू तो मेरे वार से पहले ही बेबस हो गया.

बुद्धिपलट अपनी मानसिक किरणे स्टील पर छोड़ता है...और स्टील का दर्द तो जैसे कई गुना बढ़ जाता है....कराहता हुआ स्टील अपने मुँह के बल ज़मीन पर आ गिरता है....दिमाग पर पद रहे जोर और अत्यधिक दबाव के दर्द से तड़पता हुए स्टील का भारी-भरकम शरीर ज़मीन पर पड़ा झनझना रहा था जैसे उसे मिर्गी का दौरा पड़ा हो. सड़क से टकराते स्टील की आवाज़ बता रही थी की स्टील का दिमाग किसी भी वक़्त उसके 450 किलो वज़नी शरीर का साथ छोड़ सकता है. स्टील अपने डेशबोर्ड पर बड़ी मुश्किल से हरकत करता है और....उसकी कार जुम्बा के उस आदमी को ज़ोरदार टक्कर मारती है जो स्टील पर लगातार किरणों का वार कर रहा होता है..उसकी गन भी कार के नीचे आकर क्षतिग्रस्त हो जाती है..स्टील का दर्द कुछ कम होता है पर बुद्धिपलट अपनी मानसिक किरणे छोड़ना जारी रखता है..स्टील अपने हिलते हुए हाथो से अंदाजा लगा कर बुद्धिपलट के दोनों हाथो और पैरो पर गोलियां चलाता है....गोलियां सही निशानों पर बुद्धिपलट के दोनों हाथो और दोनों पैरो पर लगती है. बुद्धिपलट चीत्कार मार कर ज़मीन पर गिर जाता है....पर फिर भी स्टील पर किरणे छोड़ना जारी रखता है..दोनों ही दर्द से तड़प रहे होते है..स्टील सड़क पर रेंगता हुआ बुद्धिपलट तक पहुँचने की कोशिश करता है पर बुद्धिपलट उस से काफी दूर था....तब स्टील फिर अपने डेशबोर्ड पर उँगलियाँ फेरता है और उसकी कार उसके बगल मे आकर रुक जाती है....स्टील खडा होकर अपनी कार मे चढ़ नहीं सकता था....वो हाथ बढा कर कार का दरवाज़ा खोलता है और कार की सीट के नीचे हाथ फसा कर कार के साथ घिसटता हुआ बुद्धिपलट के पास पहुँचता है और उसके पास रेंगता हुआ अपनी पूरी शक्ति जुटाकर उसके सर पर अपने हथोडे से भारी हाथ का वार करता है.....बुद्धिपलट बेहोश हो जाता है....और उसके बगल मे बेजान स्टील पड़ा होता है....जिसका दिमाग शायद दबाव से अँधेरे मे डूब चूका था.


जुम्बा बुद्धिपलट तक पहुँचने की सोचता है की तभी उसे दूर से आता भारी पुलिस बल दिखता है जो शहर मे हो रहे अपराधो से पूरी तरह सक्रिय था. जुम्बा अपने गैंग के साथ वहां से फरार हो जाता है.
 
पुलिस ने बुद्धिपलट को गिरफ्तार कर लिया.... बाद मे हुए डाक्टरी परिक्षण मे पता चला की सर पर हुए ज़ोरदार वार से और गोलियां लगने से ज्यादा खून बह जाने की वजह से बुद्धिपलट "कोमा" मे चला गया है. स्टील को होश आया और वो अपनी डयूटी पर चला गया......ये जानकार जुम्बा निराश था की बुद्धिपलट की मानसिक तरंगो से स्टील को कुछ नहीं हुआ.

अगली सुबह बिहार से आये कुछ माफिया और गुंडे राजनगर के दो बड़े व्यापारियों का सरे-आम अपहरण करके ले जा रहे थे. उन्होंने इंस्पेक्टर स्टील के बारे मे सुना तो था पर लालच वश वो लोग राजनगर मे अपराध करने आ ही गए. वो लोग राजनगर से गुज़र ही रहे थे की उन्हें स्टील रोकता है.....अपहरणकर्ताओ के पीछे लगी पुलिस सन्तुष्ट हो जाती की की आगे स्टील ड्यूटी पर तैनात है. कुछ देर बाद सबको चौकाने वाली खबर मिलती है की अपहरणकर्ता फरार हो गए है. स्टील बताता है की उसने अपहरणकर्ताओ की गाडी को रोका और ओवर-स्पीडिंग पर चेतावनी देकर उन्हें जाने दिया. वैसे तो स्टील को इस अपहरण की सूचना वायरलेस सिस्टम से बहुत पहले दे दी गयी थी.....पर सूचना तंत्र की गडबडी मानकर इस घटना को भूला दिया गया क्योकि कोई भी ये मानने को तैयार नहीं था की इंस्पेक्टर स्टील से ऐसी गलती हो सकती है. पर अगले दिन अखबार मे इस खबर को पढ़कर जुम्बा की बांछें खिल गयी.

जुम्बा - "बुद्धिपलट ने तो अपना काम पूरा कर दिया अब मै अपना काम शुरू करता हूँ."
 
जुम्बा अपने गैंग के साथ बेधड़क राजनगर मे खुले-आम संगीन अपराध करने लगा जैसे उसने इंस्पेक्टर स्टील को मार दिया हो. एकसाथ इन अपराधो से राजनगर मे सभी भयभीत और स्टील की नाकामी पर चिंतित थे. अंततः जुम्बा स्टील के सामने अपने गैंग के साथ एक बैंक डकैती कर रहा होता है. पर स्टील उसे कुछ नहीं कहता और सड़क पर बिना हेलमेट के बाइक चला रहे एक युवक को रोकने मे लग जाता है. वो युवक स्टील को देख कर डर जाता है और अपनी बाइक की स्पीड तेज़ कर देता है. पर स्टील उसकी बाइक के पहियों पर गोलियां मार कर उसे गिरा देता है.....फिर स्टील उस घायल युवक को गिरफ्तार करके कागजी कार्यवाही मे लग जाता है....जबकि उसके सामने जुम्बा का गैंग डकैती को अंजाम दे रहा होता है.

बैंक डकैती की खबर पर स्थानीय थाने की पुलिस वहां आकर जुम्बा के गैंग से मुतभेड करने मे लग जाती है. पुलिस के सिपाही जुम्बा के गैंग के गुंडों के अत्याधुनिक हथियारों के आगे टिक नहीं पा रहे थे. स्टील के सामने कुछ पुलिस वाले शहीद हो गए थे पर इस सब के बीच स्टील अगली सड़क पर एक व्यक्ति से बहस करने मे लगा था.

इंस्पेक्टर स्टील - मै तुम्हारा 500 रुपयों का चालान काट रहा हूँ.

व्यक्ति - ये तो हद हो गयी....वहां डकैती पड़ रही है....मुझे इस पान की दूकान के पीछे छुपने दो वर्ना तुम्हारा तो कनस्तर वाला शरीर है..तुम्हे तो कुछ होने नहीं वाला पर मुझ पर तो गोलियां असर करेंगी....एक-दो गोलियां तो यहाँ से गुजरी भी है....

इंस्पेक्टर स्टील - क्या तुम चालान भर रहे हो?

व्यक्ति - मगर क्यों? मैंने किया क्या है?

इंस्पेक्टर स्टील - तुम सार्वजनिक स्थान पर धूम्रपान करते हुए पकडे गए हो....

व्यक्ति - सर, मुझे सुबह-सुबह सिगरेट पीने की आदत है....मै तो कुरते-पजामे मे बिना पर्स लिए निकला था....मेरे पास तो बस 9 रुपये थे जिनकी मैंने 2 सिगरेट खरीद ली....मुझे माफ़ कर दो सर गलती हो गयी.

इंस्पेक्टर स्टील - तुम्हारे पास चालान भरने के पैसे नहीं है. मै तुम्हे गिरफ्तार करता हूँ.

अब तक वहां राजनगर पुलिस के डिप्टी कमिशनर राघव राम आ चुके थे ....जिन्हें स्थिति के बारे मे जानने मे देर नहीं लगी. वो गुस्से मे सिग्नल तोड़ने पर लोगो का चालान काट रहे स्टील के पास पहुँचते है.

राघव राम - इंस्पेक्टर, शहर भर मे लूट-पाट मची है....तुम्हारे सामने बैंक डकैती हो गयी....तुम्हारे साथी पुलिसकर्मी मारे गए और तुम यहाँ ट्रेफिक और छोटे-मोटे अपराधो को काबू कर रहे हो....

गिरफ्तार हुआ व्यक्ति - अरे सर जी मुझे तो इन्होने सिगरेट पीने पर ही पकड़ लिया.

इंस्पेक्टर स्टील - सर, बैंक डकैती, लूट-पाट, हत्या ये सब तो साधारण अपराध है. मैंने आज ही देखा की इस व्यक्ति जैसे संगीन अपराधी जगह-जगह बिना डरे अपराध कर रहे है और उन्हें पुलिस वाले भी कुछ नहीं कर रहे....इतने लोग सिग्नल तोड़ रहे है पर किसी को चिंता ही नहीं....

राघव राम - स्टील तुम पागल हो गए हो क्या.....छोडो इस आदमी को....और ये बहस हम बाद मे भी कर सकते है. इस वक़्त फरार होते जुम्बा के आदमियों को पकडो.

इंस्पेक्टर स्टील - सर, आई ऍम सॉरी, बट यू आर अंडर अर्रेस्ट....आपने एक पुलिस वाले के काम मे दखल दिया है. आपको पुलिस थाने से ज़मानत मिल जायेगी.

राघव राम - क्या? तुम्हारा दिमाग तो ठीक है....अब तो मै तुम्हे सस्पेंड करवाकर ही दम लूँगा.

इंस्पेक्टर स्टील - अभी आप मेरे साथ पुलिस स्टेशन चलिए.


इंस्पेक्टर स्टील साधारण अपराधो के तहत गिरफ्तार किये गए लोगो के साथ डिप्टी कमिशनर राघव राम को स्थानीय पुलिस थाने ले आया. उधर शहर मे जुम्बा का कहर जारी था.
 
स्टील की हरकतों की वजह से उसे तुंरत प्रभाव से सिविल पुलिस से हटा दिया गया. स्टील के भविष्य पर पुलिस मुख्यालय मे विचार चल रहा था. शहर भर मे अर्धसैनिक बालो की तैनाती हो गयी थी पर फिर भी जुम्बा के अपराधो मे कमी नहीं आयी थी.

उस दिन के "राजनगर दैनिक" के पहले पन्ने की मुख्य खबर.

सरफिरा हुआ राजनगर का रखवाला....
राजनगर की फ़र्ज़ की मशीन कहे जाने वाले सुपर कॉप इंस्पेक्टर स्टील के व्यव्हार मे कल अजीब सा बदलाव देखा गया. वो बड़े अपराधो को नज़रंदाज़ करते हुए मामूली अपराध मे दोषी लोगो को पकड़ने मे जी-जान से लगे हुए थे. कल शहर भर मे जुम्बा नामक अपराधी और उसके गैंग का आतंक रहा. उस गैंग के लूट-पाट, हत्या, अपहरण, जैसे कुछ संगीन अपराध तो खुद इंस्पेक्टर स्टील के सामने हुए....पर इंस्पेक्टर स्टील साधारण यातायात नियमो को तोड़ने वाले व्यक्तियों के चालान काटने मे मशगूल रहे. यहाँ तक की उनके डर से उनसे बचकर भागते बाइक सवार एक युवक की बाइक के टायरों पर इंस्पेक्टर स्टील ने गोलियां चलायी जिस वजह से संतुलन खोकर वो बाइक सवार गंभीर रूप से घायल हो गया. खबर ये भी मिली है की सार्वजनिक स्थानों पर बहस करते या धूम्रपान करते लोगो से उन्होंने भारी चालान लिया और चालान का भुगतान ना करने वालो को तुंरत गिरफ्तार कर लिया. कल की घटनाओ से शुब्ध राजनगर के डिप्टी कमिशनर श्री राघव राम ने इंस्पेक्टर स्टील को बर्खास्त करने की सिफारिश करते हुए पुलिस मुख्यालय मे अपनी रिपोर्ट सोंपी है. सम्बंधित चित्र, खबरें और इस मामले मे विशेषज्ञों की राय स्थानीय पन्ने पर देखे.
 
राजनगर से जुड़े हाईवे के एक सुनसान हिस्से पर एक जानी-पहचानी आकृति चहल कदमी कर रही थी. ये असमंजस मे पड़ा स्टील था जो आज रोज़ की तरह अपने गश्त नहीं कर रहा था. उसने हाईवे को शहर की भीड़ से बचने के लिए और अकेले मे एक बाद एक हो रही अजीब घटनाओ को समझने के लिए चुना था. आज पहली बार स्टील के दिमाग मे भावनाओ का सैलाब उमड़ रहा था. अपने उच्च अधिकारीयों के आदेशानुसार वो आज ड्यूटी पर नहीं था. स्टील को ये अंदेशा तो था की कहीं कुछ गड़बड़ है.....पर वो उस गड़बड़ को समझ नहीं पा रहा था. उसके दिमाग मे बार-बार ये तर्क आ रहा था जब वो अपनी जानकारी के हिसाब से अपना फ़र्ज़ ठीक तरह से निभा रहा था तो सब लोग उसे गलत क्यों कह रहे थे. स्टील इस भावनात्मक उथल-पुथल से जल्द ही बाहर आया....और पुलिस मुख्यालय को रवाना हो गया.

मुख्यालय पहुँच कर वो उसके भविष्य पर कई घंटो से विचार और बहस कर रहे अधिकारीयों के सामने पहुंचा और अपनी सफाई और प्राथना रखी.

इंस्पेक्टर स्टील - मुझे पता है की अपराध रोकने के लिए मै जो कर रहा हूँ वो काफी नहीं है.....अकसर एक अपराध रोकते हुए मुझे बताया जाता है की मै उस से कहीं बड़ा अपराध नहीं रोक रहा.....मै सिर्फ छोटे-मोटे अपराधो को रोक रहा हूँ.....कहीं कुछ गड़बड़ है....और इसका अंदेशा मुझे भी है....मुझे भारतीय संविधान, कानून व्यवस्था और आप सब मे पूरा विश्वास है...और मै हमेशा अपने देश की सेवा करना चाहता हूँ....इसलिए जब तक ये समस्या सुलझ ना जाए तब तक मुझे बर्खास्त...सस्पैंड ना किया जाए.

एक अधिकारी - तो हम क्या करे इंस्पेक्टर....हमारे पास और क्या विकल्प है?

इंस्पेक्टर स्टील - जो काम मै ठीक से कर रहा हूँ...कम से कम वो तो मै एक पुलिस अधिकारी के रूप मे कर सकता हूँ.....जब तक ये समस्या नहीं सुलझती तब तक....आप मुझे शहर की यातायात व्यवस्था और जिला न्यायलय की सुरक्षा व्यवस्था मे नियुक्त कर दीजिये.

स्टील की बात तर्कसंगत थी और वैसे भी सभी अधिकारी स्टील को इस समस्या से निपटने का अवसर देना चाहते थे. अगले दिन स्टील को सुबह से शाम जिला न्यायलय की सुरक्षा और शाम के कुछ घंटो ट्रेफिक सँभालने की खबरों से राजनगर ही नहीं देश भर के अखबार भरे हुए थे. T.V. समाचारों मे भी राजनगर की स्थिति और स्टील की नयी नियुक्तियां दिखाई जा रही थी. जुम्बा तो इन खबरों को देख कर ख़ुशी से पागल हुआ जा रहा था.
 
 
अपराधो की बाढ़ से त्रस्त राजनगर वासियों के मन मे ये सवाल कोंध रहा था की राजनगर का दूसरा रक्षक सुपर कमांडो ध्रुव कहाँ है? कमांडो फोर्स के कैडेट्स जुम्बा के असीमित गैंग से लोहा ले रहे थे पर राजनगर मे ध्रुव की गैरमौजूदगी और स्टील की नाकामी ने दूसरे इलाकों के अपराधियों को भी राजनगर की तरफ आकर्षित कर दिया था....यानी छोटी-मोटी चोरियों से लेकर बड़े संस्थानों मे लूट तक लगातार हो रहे अपराधो ने शहर की कानून व्यवस्था को चरमरा दिया था. कमांडो फोर्स का कैप्टन ध्रुव विश्व के किसी और कोने मे धरती को किसी दूसरे भयावह खतरे से बचाने मे कुछ दिनों से जुटा था....जिस वजह से वो राजनगर को जुम्बा के कहर से बचाने मे असमर्थ था. अपने कैप्टन के बिना लगातार बढ़ते अपराधो को रोकने मे जूझ रही कमांडो फोर्स का मनोबल गिरता जा रहा था.

पर शायद आज सूरज फिर से सही दिशा से निकला था.....क्योकि जुम्बा के गैंग के कुछ गुंडों से भरी वैन का पीछा ट्रेफिक इंस्पेक्टर स्टील कर रहा था. स्टील को अपने पीछे लगा देख वैन मे सवार गुंडों के होश उड़ गए....उन्होंने उस पर फायरिंग की....और जवाब मे स्टील ने अपनी सर्विस रिवोल्वर के चार फायर्स से उनकी वैन के चारो टायर्स को ऐसी हालत मे कर दिया की उनकी वैन अनियंत्रित होकर रुक गयी. वो सब अब और ज्यादा संघर्ष करने की हालत मे नहीं थे. पुलिस ने उन्हें स्टील से अपने कब्जे मे लेकर गिरफ्तार कर लिया और उन्हें राजनगर की ख़ास सुरक्षा वाली नारका जेल के पास वाले द्वीप पर बनी नारका जेल की नयी शाखा मे भेज दिया गया.

जुम्बा ने इस घटना को साधारण माना पर अपने साथियों को सलाह दी.

जुम्बा - डरने की कोई बात नहीं है....स्टील का दिमाग ठीक नहीं हुआ है. स्टील ने उन सब को इसलिए पकडा क्योकि उन्होंने सिग्नल तोडा था....तो अब से ध्यान रखना की कानून की किताब का हर कानून तोड़ो पर कोई ट्रेफिक रूल मत तोड़ना क्योकि शहर भर के ट्रेफिक पर स्टील ख़ास सी.सी.टी.वी. कैमरों से नज़र रखता है. और अगर स्टील तुम्हारे पीछे पड़ गया तो फिर सीधे नारका जेल.....राजनगर पुलिस स्टील द्वारा पकडे गए हमारे साथियों को आसानी से तोहफे के रूप मे अपनी कस्टडी मे ले लेती है.
 
जुम्बा ने जिस बात को नज़रंदाज़ कर दिया था आज वो उसे बहुत भारी पड़ी थी क्योकि कुछ ही घंटो के अन्दर ट्रेफिक इंस्पेक्टर स्टील ने शहर मे अपराध कर रहे उसके लगभग सारे गैंग को गिरफ्तार करके स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया था. जुम्बा तो जैसे आग बबूला हो गया था....अब उसके गैंग मे 15-20 सदस्य रह गए थे. उसकी समझ मे नहीं आ रहा था की अचानक ऐसा कैसे हो सकता है की उसकी हिदायत के बाद भी ट्रेफिक नियमो को तोड़ते उसके सारे साथी गिरफ्तार हो जाए. बाद मे उसे पता चला की उसके गैंग द्वारा अपराध मे प्रयोग मे लायी गयी गाड़ियों मे से किसी की नंबर प्लेट नहीं थी तो किसी मे सीट बेल्ट ही गायब थी.....ऐसे छोटे अपराधो के लिए स्टील ने उसके साथियों को रोका और पुलिस को सोंप दिया. यहाँ तक की जुम्बा के गैंग के ज्यादातर साथी गाड़ियों से अपराध नहीं कर रहे थे उन्हें भी किसी ना किसी ट्रेफिक नियम के उल्लंघन मे स्टील ने गिरफ्तार कर लिया.

जुम्बा अब जान चूका था की कोई स्टील के ज़रिये उसे और उसके गैंग को पकड़ने की फिराक मे है. कोई स्टील का इस्तेमाल कानून और राजनगर की रक्षा के लिए कर रहा था.....पर आखिर वो था कौन?

तभी वहां घायल हालत मे जुम्बा का एक वफ़ादार तेजा पहुँचता है. जो उसे बताता है की शहर मे अपराध को निकले उसके गैंग के गुंडों के पीछे कमांडो फोर्स के कैडेट्स लग जाते है और उन्हें किसी न किसी तरह ऐसे अपराधो मे फसा देते है जिनसे स्टील उनको पकड़ने के लिए उनके पीछे लग जाए. गैंग की गाड़ियों से नंबर प्लेट और सीट बेल्ट्स भी उन कैडेट्स ने तब गायब की थी जब सभी गुंडे लूट के लिए गाड़ियों से बाहर थे. तेजा किसी तरह पुलिस कस्टडी से भाग कर आया था. एक ही दिन मे कमांडो फोर्स द्वारा बाज़ी पलट जाने से जुम्बा तिलमिला गया था और अब उसका निशाना कमांडो फोर्स थी.
 
कुछ समय से आपातकालीन स्थिति के चलते कमांडो फोर्स के सदस्यों ने अपने हेडक्वाटर को ही अपना निवास बना लिया था जहाँ वो शहर मे जूनियर कैडेट्स को लगातार रेगुलेट कर रहे थे और खुद भी जुम्बा रुपी तूफ़ान का सामना कर रहे थे. स्टील द्वारा जुम्बा के गैंग के ज्यादातर गुंडे पकड़ लिए जाने के बाद राजनगर मे अपराध रुक गए थे. शायद जुम्बा भी अपनी इस हार से डर गया हो.......इन्ही सब बातों ने आज कमांडो फोर्स को थोडा फुर्सत और सांस लेने का समय दिया था. रेणु अपने घर जाने की जल्दी मे थी....क्योकि वो थोडा वक़्त अपनों के साथ आराम से बिताना चाहती थी.

रेणु अभी कमांडो फोर्स हेडक्वाटर से कुछ ही दूर आई होगी की उसपर पीछे से किसी भारी चीज़ का वार हुआ और रेणु की आँखों के सामने कुछ पालो के लिए अँधेरा छा गया. बेहोश सी होती रेणु ने अपना स्मोक फ्लेयर छोडा और उसके चारो तरफ धुआं छा गया. कुछ देर बाद जब धुआं छटा तब अर्ध-बेहोशी मे ज़मीन पर कराहती रेणु को अपने हर तरफ जुम्बा और उसके बचे हुए साथी दिखे.

जुम्बा - बड़ा अफ़सोस है मुझे की मैंने तेरे सर को डोज़ दे दी इसलिए आज तू ज्यादा उचल-कूद नहीं कर पाई. अब समय पूरा हुआ लड़की. तेरे बाकी साथियों को भी मै जल्द तेरे पास भिजवा दूंगा......

जुम्बा अपनी गन से रेणु को गोली मारने की वाला था की उसकी गन पर एक झटके से उसके हाथ से दूर जाकर गिरती है क्योकि उस गन पर ही किसी ने निशाना साध कर गोली मारी थी.

"समय तो तेरा पूरा हो चुका है, जुम्बा."

आवाज़ की दिशा मे घूमा जुम्बा सिहर उठा.
 
"ओह, इंस्पेक्टर स्टील...मुझे अब तक समझ जाना चाहिए था. ये सब तेरा किया धरा था....तू ठीक कब हुआ?"

इंस्पेक्टर स्टील - हाँ, ये सब मेरी और कमांडो फोर्स की सोची समझी रणनीति थी. बुद्धिपलट से दूसरी मुतभेड के बाद मुझे सभी से ये पता चला की मै बड़े अपराधो को नज़रंदाज़ कर छोटे अपराधियों को सख्ती से पकड़ रहा हूँ. जबकि मेरे बाकी fuctions सही काम कर रहे थे. मुझे समझ नहीं आ रहा था की मेरे शरीर मे या दिमाग मे ऐसी क्या कमी है....जो मेरे अलावा सबको दिख रही है? इस गड़बड़ को ठीक करने के लिए मुझे समय चाहिए था और इसका हल था की मै अपने दिमाग की सारी कानूनी जानकारी, दंड प्रावधान, भारतीय संविधान को दोबारा से समझूँ और उनका सही क्रम मे पालन करूँ क्योकि बुद्धिपलट ने मेरे इंसानी दिमागी को निशाना बनाकर उसमे दर्ज सिर्फ legal information की संरचना बदली थी ना की मशीनी शरीर की. इसलिए मैंने कुछ दिनों तक जिला न्यायालय मे ड्यूटी की. वहां हर छोटे-बड़े केस पर उपस्थित होने से धीरे धीरे मुझे कुछ दिनों मे अपराधो और उनके दंड की सही जानकारी पता चली. ट्रैफिक इंस्पेक्टर का काम मैंने कमांडो फोर्स की सलाह पर किया ताकि मै तुम्हारे जाने बिना तुम्हारे ज्यादा से ज्यादा साथियों को पकड़ सकूँ और तुम्हारी ताकत कम कर सकूँ. तेजा का तुम तक पहुंचना और रेणु का ऐसे कमांडो फोर्स से छुट्टी लेकर जाना सब तुम्हे और तुम्हारे बचे साथियों को यहाँ लाने की चाल थी. अब तुम और तुम्हारा गैंग मुझे किसी नुक्कड़ के गैंग से ज्यादा नहीं लग रहा जिस से कमांडो फोर्स का अकेला कैडेट भी निपट सकता है.

जुम्बा - थू है तुझ पे स्टील के रोबोट...कहते है अपने दुश्मन को कभी कम नहीं आंकना चाहिए....क्यों...ये तुझे अभी पता लग जाएगा.

जुम्बा के आदमी आराम से हाथ बाँध कर खड़े हो गए और जुम्बा के सामने आये पीटर, करीम, रेणु और बाकी कैडेट्स....जुम्बा के हलके वारो से ही दूर जा गिरे.

जुम्बा - आजा फ़र्ज़ की मशीन तेरे भी पुर्जे टाइट कर दूँ....हा हा हा.

इंस्पेक्टर स्टील जुम्बा की तरफ बढा और जुम्बा ने स्टील पर एक ज़ोरदार प्रहार किया जिसको देख कर सबके होश उड़ गए. जुम्बा के इस वार से इंस्पेक्टर स्टील उड़ता हुआ दूर राजनगर से सटे समुद्र मे जा गिरा...और ये नज़ारा देख कर सभी कमांडो फोर्स कैडेट्स के होंसले पस्त से हो गए.

जुम्बा - कितनी आसानी से ख़त्म कर सकता था मे स्टील को और फिर भारत के बाकी हीरोज़ को मैंने फालतू मे ही पहले यहाँ की स्थिति और इन पिद्दियों की शक्तियों को जानने मे समय नष्ट किया. ये था 450 kilo के कनस्तर को 4500 किलो के आदमी का मुक्का. मैंने अपने अन्दर ये प्रणाली विकसित की है की मै अपने सामने आये दुश्मन की शक्ति से असीमिति गुना ज्यादा शक्ति अपने शरीर मे ला सकता हूँ. ये शक्ति मुझे हवा के कणों से मिलती है. मेरे यंत्र बता रहे है की यहाँ राजनगर मे इस वक़्त हवा की लिमिट इतनी ही है यानी स्टील की शक्ति की लगभग 10 गुना और इन जोकरों की शक्ति से 80-90 गुना ज्यादा शक्ति खुद मे समेट सकूँ. अब मेरे शरीर मे ये सिस्टम तब तक Activate रहेगा जब तक कमांडो फोर्स के ये चूहे न ख़त्म हो जाए.

कमांडो फोर्स के कैडेट्स ने हार नहीं मानी थी और वो जुम्बा का ध्यान बंटाते हुए उसके सभी साथियों को घायल कर, बेहोश कर चुके थे. पर जुम्बा के सामने आने पर उन्हें पता था की वो एक हारी हुई लडाई लड़ रहे है.
 
जुम्बा के वारो से कैडेट्स उड़कर इमारतों, सड़क और वाहनों से टकरा रहे थे. लडते लडते कैडेट्स अधमरे हो गए...जबकि जुम्बा उनसे खेलने के मूड मे था. सड़क पर कराहते पीटर को कुचलने के लिए बढे जुम्बा पर स्टील का वार हुआ जिस से जुम्बा ठिठका.

जुम्बा - आ गए...इंस्पेक्टर साहब! देखिये आपके शहर मे कानून व्यवस्था की क्या हालत है....कमांडो फोर्स के कैडेट्स भी कुछ नहीं कर पा रहे है.

इंस्पेक्टर स्टील - इन सबको जाने दो....मुझसे लड़ो.

जुम्बा - ओह! तुमसे लडूँ. हा हा हा...ठीक है...पर एक शर्त पर, इनकी जगह अब मै तुमसे खेलूँगा...ये खिलोने तो एक दो वारो मे बोल गए...देखते है ये स्टील का झुनझुना कब तक बजता है.

जुम्बा के हलके वार कानून के उस स्टीली स्तंभ को पिचकाने लगे. स्टील का एक पैर उखाड़ दिया जुम्बा ने....अब स्टील के अंगो का संपर्क उसके दिमाग से शिथिल होता जा रहा था. करीम से ये देखा न गया और वो तेज़ गति S.U.V. कार लेकर जुम्बा से जा टकराया. जिसके धक्के से जुम्बा मलबे मे जा गिरा. उसने स्टील को समझाया...

करीम - इंस्पेक्टर! जुम्बा के अनुसार वो अपने सामने वाले दुश्मन की उर्जा की असीमित गुना उर्जा खुद मे हवा के कणों से खींच सकता है....इस समय यहाँ की हवा की सीमा तुम्हारी उर्जा से 10 गुना ज्यादा है. तुम इसके सामने मत जाओ....

इंस्पेक्टर स्टील - अरे वाह! क्या बात बताई है...अब तो मुझे उसके सामने जाना ही पड़ेगा.

स्टील ने अपनी योजना करीम को जल्दी से सुनाई.

जुम्बा - चूहों को दूर रख, स्टील....वर्ना सबको बिल मे घुस घुस कर मारूंगा. अभी तो मुझे तुझसे 'लंगड़ी' खेलनी है. उठ...

स्टील जुम्बा के सामने आया और उसने अपने डेशबोर्ड के कुछ बटन्स दबाये...और दोनों स्टील और जुम्बा बेजान शरीर ज़मीन पर आ गिरे. करीम ने तुरंत पीछे से जुम्बा की आँखों मे कुछ समय के लिए आँखों की धमनियां सिकोड़ कर अँधा कर देने वाली दवाई डाली. कमांडो फोर्स ने जुम्बा को बाँध दिया. बदहवास जुम्बा चिल्लाया.

जुम्बा - ये क्या किया तूने...ये क्या हुआ....

करीम - तुमने ही तो ख़ुशी के मारे बताया था कि तुम अपने सामने वाले दुश्मन कि असीमित गुना उर्जा हवा से ले सकते हो. पर अगर सामने वाले कि उर्जा ही शून्य हो जाए तो शून्य का असीमित गुना भी शून्य होता है. (0 * ∞ = 0) लो बातों बातों मे हमने तुम्हारे शरीर का स्कैन करके ये पता लगा लिया है कि तुम्हारी उर्जा का मूल तुम्हारे हाथ मे है जिसको हम तुम्हारे शरीर से काट देते है....जुम्बा का दाया हाथ काट दिया गया.

जुम्बा - नहीं.....आsssssss......बहुत दर्द हो रहा है...मुझे लगा तो था की एक ना एक दिन ऐसा हो सकता है...पर मै ऐसे नहीं मरूँगा पूरे राजनगर को साथ लेकर मरूँगा. मैंने अपना और अपने साथियों का Multiple Destruction Mode चला दिया है....अब 10 मिनटस के अन्दर मै और मेरे सभी साथियों की कोशिकाएं इतनी बहुगुणित हो जायेंगी की वो खतरनाक न्यूक्लिअर बमो की तरह फटकर राजनगर और आस पास के इलाकों को तबाह कर देंगे.

इतना कहते ही जुम्बा और उसके साथियों के शरीर निर्जीव होकर ज़मीन पर गिर पड़े और उन सबके शरीर चमकने लगे. स्टील अब तक खुद को सामान्य कर चूका था.
 
स्टील ने सारी स्थिति समझ ली थी. उसने सभी निर्जीव गुंडों को अपनी नाइलो रोप से बांध दिया. और 15 सेकंड्स बाद वो बेजान शरीर स्टील के ख़ास हेलीकाप्टर मे जा रहे थे...जिसमे नारका जेल की दिशा इंस्पेक्टर स्टील ने फीड कर दी थी.

करीम - हम इन बेजान शरीरो को यहीं नष्ट कर सकते है...

इंस्पेक्टर स्टील - ये तो कुछ नहीं, पर असली परेशानी नारका जेल मे बंद जुम्बा के साथी है. इंस्पेक्टर स्टील ने नारका जेल के जेलर और अधिकारीयों को वायरलेस संदेश भेजा.

"नारका जेल मे चमकते शरीर वाले जुम्बा गँग के गिरफ्तार बेजान सदस्यों को नारका के मुख्य द्वीप वाले जेल पर एकत्रित कीजिये और आप स्पीड बोट्स मे जेल अधिकारीयों और कैदियों को लेकर 3 मिनटस के अंदर समुद्र का रास्ता पकडिये क्योकि जल्द ही मेरा हेलीकाप्टर आपके मुख्य द्वीप से टकराएगा जिससे नारका का मुख्य द्वीप तबाह हो जाएगा. शोक-वेवस आस-पास के समुद्री इलाकों मे भी जायेंगी. जल्दी कीजिये! जब आप लोग स्पीड बोट्स पर बैठ जाए तब तुरंत मुझे तुरंत संदेश कीजिये."

नारका जेल प्रशाशन ने तेज़ी दिखाई और 2 मिनट्स 57 सेकंड्स बाद ही जेलर का संदेश स्टील को मिल गया. अब तक नारका द्वीप के चक्कर लगाता इंस्पेक्टर स्टील का ख़ास चोपर्र तुरंत ही स्टील के आदेशानुसार नारका जेल के मुख्य द्वीप वाले जेल से टकराया जिसमे जुम्बा के बेजान साथी पड़े थे. एक बड़े धमाके के साथ नारका जेल के परखच्चे उड़ गए. तीन मिनट्स और कुछ सेकंड्स गुजरने की वजह से जुम्बा द्वारा शुरू की गयी "Multiple Destruction Mode" प्रक्रिया अपने चरम तक नहीं पहुँच पायी और वो धमाका नारका जेल के आस पास के समुद्री स्थान तक सीमित रहा.

घटना के बाद कमांडो फोर्स तुरंत शहर की कानून व्यवस्था को सुधारने के काम पर लग गयी....और अपना शरीर ठीक करने के बाद, स्टील ने कुछ घंटे बाद ही अपनी ड्यूटी दोबारा ज्वाइन कर ली. स्टील को ससम्मान सारे पदक और सम्मान वापस किये गए...और उसे एक नए सम्मान विशिष्ट पुलिस पदक से सम्मानित किया गया.

समाप्त!!!!!!!!

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